¦ मेरा गोण्डा मेरी शान ¦

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से करीब 120 किमी. दूर सरयू और राप्ती नदियों के मध्य स्थित गोण्डा जनपद ऐतिहासिक व राजनीतिक रूप से काफी समृद्ध रहा है। सैकड़ों वर्षों तक देश पर अंग्रेजों के शासन के बावजूद तत्कालीन गोण्डा नरेश देबी बख्श सिंह ने 1857 तक उन्हें जिले की सीमा में नहीं फटकने दिया। योग के प्रणेता महर्षि पतंजलि के साथ ही श्री रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास, भगवान घनश्याम, महाकवि घाघ और अदम गोण्डवी ने इसी जिले की धरती पर जन्म लिया। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न पंडित अटल बिहारी बाजपेयी को प्रथम बार लोकसभा भेजने तथा राष्ट्रपति पद को सुशोभित करने वाले फखरुद्दीन अली अहमद को प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करने का गौरव भी इसी जिले को जाता है।

गोण्डा महोत्सव में स्थानीय प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए न केवल विविध लोक कलाओं पर केन्द्रित सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, अपितु एक भब्य सद्भावना रैली भी निकाली जाती है। महोत्सव में हाकी, कबड्डी, वालीबाल जैसी खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं की खोज की जाती है तथा लुप्त हो रही स्थानीय लोक कलाओं बिरहा, फरवाह नृत्य, आल्हा आदि के कलाकारों को मंच प्रदान करके इन्हें जीवित रखने का प्रयास भी किया जा रहा है। इस बार गोण्डा महोत्सव में अवधी, भोजपुरी, बालीवुड नाइट के साथ ही अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं कुलहिन्द मुशायरा भी आयोजित किया जाएगा। वर्ष 2015 में तत्कालीन जिलाधिकारी अजय कुमार उपाध्याय के नेतृत्व में शुरू किए गए गोण्डा महोत्सव को उनके उत्तराधिकारी आशुतोष निरंजन ने आगे बढ़ाया। इस जिले को लगातार बुलन्दियों पर पहुंचाने के लिए सतत् प्रयत्नशील रहने वाले कर्मठ जिलाधिकारी जे.बी. सिंह के कुशल नेतृत्व में 10 से 13 मार्च 2018 तक आयोजित होने वाला गोण्डा महोत्सव नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। तो आएं और महोत्सव का आनंद लें।